ज़ुल्मत

गहरे अंधेरे में ... कविता तुम्हारे लिए हैI

उस की बातें तो फूल हों जैसे

उसकी बातें तो फूल हों जैसे
बाकी बातें बबूल हों जैसे

तेरा चेहरा है आइने जैसा

तेरा चेहरा है आईने जैसा
क्यों न देखूँ है देखने जैसा

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